Basti News: 243 स्कूलों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन, सिर्फ 39 से हटी, 204 पर अभी भी खतरा
जिले में परिषदीय विद्यालयों के 243 भवनों या परिसरों के ऊपर से हाईटेंशन (एचटी) लाइनें गुजर रही हैं। शासन के सख्त निर्देश के बाद भी विभाग अब तक सिर्फ 39 विद्यालयों से ही इन लाइनों को हटा पाया है। यानी आज भी 204 स्कूल ऐसे हैं जहां मासूम बच्चे हाईटेंशन लाइन के खतरे के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा खतरा बरसात के मौसम में रहता है।
अजीत मिश्रा (खोजी)
बारिश में खतरा कई गुना बढ़ जाता है, शिक्षकों, बच्चों और अभिभावकों में दहशत। शासन के आदेश के बाद भी नहीं हटीं लाइनें।
बस्ती।। जिले में कुल 2071 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 243 विद्यालय ऐसे चिन्हित किए गए हैं जिनके भवन के ऊपर से या परिसर के अंदर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है।
शिक्षा विभाग के एक आंकड़े के मुताबिक, इस संबंध में शासन स्तर से कई बार निर्देश जारी हो चुके हैं कि किसी भी स्कूल के ऊपर से हाईटेंशन लाइन न गुजरे। यदि है तो उसे तत्काल शिफ्ट किया जाए। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने विद्युत विभाग को सूची भी सौंपी थी।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी तक सिर्फ 39 विद्यालयों से ही लाइनें हटाई जा सकी हैं। ऊर्जा निगम की टीम ने इन विद्यालयों के ऊपर से जा रही लाइन को दूसरी जगह डायवर्ट किया है। शेष 204 विद्यालयों में अभी भी एचटी लाइन जस की तस बनी हुई है।
दो तस्वीरें, एक ही हकीकत:
🔥प्राथमिक विद्यालय टेंगरिया राज: यहां स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार और परिसर के ठीक ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है।
🔥प्राथमिक विद्यालय बनकटा: यहां भी स्कूल परिसर के अंदर ही बिजली का पोल और लाइन लगी हुई है, जो कभी भी बड़े हादसे को दावत दे सकती है।
बारिश में बढ़ जाता है खतरा:
शिक्षकों का कहना है कि सूखे मौसम में तो किसी तरह काम चल जाता है, लेकिन बरसात में करंट उतरने और शॉर्ट-सर्किट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बच्चे खेल-खेल में पोल के पास चले जाते हैं। इस वजह से शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों में हमेशा भय बना रहता है। कई अभिभावकों ने तो इस डर से बच्चों को स्कूल भेजना भी कम कर दिया है।
“जिन विद्यालयों के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गई है, उन्हें चिन्हित किया गया है। शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। बहुत जल्द सभी स्कूलों से लाइनें हटवाई जाएंगी।” – बेसिक शिक्षा अधिकारी
“बारिश के दौरान खतरा और बढ़ जाता है। हम लोग बच्चों को उस तरफ जाने से रोकते हैं। कई बार लिखित में भी शिकायत की है।” – एक प्रधानाध्यापक
सूत्रों के मुताबिक, लाइन शिफ्टिंग के लिए लगभग 1.25 लाख रुपये प्रति स्कूल का एस्टीमेट आता है। बजट आवंटन न होने और विद्युत विभाग व शिक्षा विभाग के बीच तालमेल की कमी के कारण काम अटका हुआ है।
सबसे बड़ा सवाल:
जब शासन का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी स्कूल के 100 मीटर के दायरे में हाईटेंशन लाइन नहीं होनी चाहिए, तो फिर 204 स्कूलों के मासूमों की जान जोखिम में क्यों डाली जा रही है? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
इन ब्लॉकों में है ज्यादा खतरा:
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हर्रैया, बनकटी, रुधौली, कप्तानगंज, सल्टौआ जैसे ब्लॉकों में सबसे ज्यादा स्कूल इस जद में हैं।









